सीएम डॉ. मोहन की अध्यक्षता में हुए कई अहम फैसले, जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी


सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति
प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए 27,050 करोड़ रुपये की स्वीकृति
94 सांदीपनि वि‌द्यालयों के वि‌द्यार्थियों के परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रुपये की स्वीकृति

15 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 15 अक्टूबर को कैबिनेट के बैठक में कई अहम फैसले लिए। कैबिनेटने प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए लगभग 27,050 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक प्रस्तावों को मंजूरी दी। प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं निवेश को नई गति देने के लिए मंत्रि-परिषद ने जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ चयनित औद्योगिक एवं आर्थिक हबों के समेकित विकास के लिए पूर्णतः शासकीय स्वामित्व वाली विशेष कंपनी (एसपीवी) जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड गठित करने की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार कंपनी पर मध्यप्रदेश शासन का पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण रहेगा। कंपनी के सुदृढ़ वित्तीय आधार के लिए राज्य शासन द्वारा 100 करोड़ रुपये की प्रारंभिक चुकता पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी के प्रभावी संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सामान्य निकाय गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा नामित एवं नियुक्त उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सशक्त कार्यकारी निकाय के माध्यम से कंपनी के कार्यों का संचालन किया जाएगा।

इकॉनोमिक हब के तीव्र और सुव्यवस्थित विकास के उद्देश्य से विशेष कंपनी को भूमि की पहचान, भूमि प्रबंधन, भू-अर्जन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट, भू-आवंटन, लीज/सब-लीज, मोनेटाइजेशन तथा बुनियादी व सामाजिक अधोसंरचना के विकास की शक्तियां प्रदान की जाएंगी। आवश्यकतानुसार राज्य शासन की भूमि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से रियायती दर या निर्धारित शर्तों पर कंपनी को उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में वन भूमि की आवश्यकता होने पर संबंधित केंद्रीय एवं राज्य कानूनों, पूर्वानुमोदन, क्षतिपूर्ति वनीकरण तथा एनपीवी सहित सभी वैधानिक शर्तों की पूर्ति के बाद ही भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

नोडल एजेंसी के रूप में सौंपे जाएंगे आवश्यक शक्तियां और दायित्व
कंपनी को ‘मध्यप्रदेश निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंध अधिनियम, 2013’ के अंतर्गत उपयुक्त इन्वेस्टमेंट रीजन एजेंसी के रूप में अधिकृत किया जाएगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के अंतर्गत विधि विभाग की सहमति से अधिसूचित इकॉनोमिक हब के लिए इसे नोडल एजेंसी के रूप में आवश्यक शक्तियां और दायित्व सौंपे जाएंगे। कंपनी के कार्य क्षेत्र के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण इसके दायरे में नहीं होगा। कंपनी का संपूर्ण ध्यान आर्थिक हब के भीतर आंतरिक एवं साझा अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों के संवर्धन पर ही केंद्रित रहेगा। विशेष कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, सेक्टोरल पार्क जैसे फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी/आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आदि साझा सुविधाएं आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पीपीपी, ईपीसी, कन्सेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम तथा डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे विभिन्न वैधानिक मॉडलों का उपयोग किया जा सकेगा। इस निर्णय के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को परियोजना से जुड़े विभागों जैसे वित्त, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, वन तथा विधि विभाग से आवश्यक समन्वय कर अधिसूचनाएं, शासनादेश एवं अन्य वैधानिक दस्तावेज जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।

भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने किसानों को खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति दी है। यह योजना भारत सरकार के ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ ( पीएम-आशा) के तहत संचालित ‘प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम’ (पीडीपीएस) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों को उनकी औसत गुणवत्ता वाली सोयाबीन उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित कराना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। योजना के अंतर्गत अधिसूचित मंडियों में उपज की विक्रय अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है जिसे आवश्यकता पड़ने पर संशोधित किया जा सकेगा। योजना के तहत किसानों को भुगतान उनके पंजीकृत रकबे और विगत वर्ष विभाग द्वारा निर्धारित राज्य स्तरीय औसत उत्पादकता के आधार पर किया जाएगा। किसी किसान ने यदि योजना अवधि से पूर्व यानी 1 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 के बीच मंडी में सोयाबीन बेची है तो उस मात्रा को उसकी कुल पात्रता सीमा में से घटाकर केवल शेष मात्रा पर ही भावांतर राशि का भुगतान मान्य किया जाएगा।

डीबीटी से ट्रांसफर होगी रकम
भावांतर योजना में भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मॉडल रेट की व्यवस्था लागू की गई है। सीजन के प्रथम 14 दिनों के लिए मॉडल रेट का निर्धारण प्रदेश की सभी मंडियों के भारित औसत के आधार पर किया जाएगा जो 22 अक्टूबर 2026 से आगामी 14 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद प्रतिदिन विगत 14 दिनों के भारित औसत के आधार पर मॉडल रेट तय कर उसे ई-मंडी पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। मंडी में बिक्री मूल्य यदि एमएसपी के बराबर या उससे अधिक रहता है तो कोई प्रतिपूर्ति नहीं दी जाएगी। बिक्री मूल्य यदि एमएसपी से कम लेकिन मॉडल रेट से अधिक रहता है तो किसान को एमएसपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के अंतर की राशि मिलेगी। वहां बिक्री मूल्य मॉडल रेट के बराबर या कम होने पर किसान को एमएसपी और घोषित मॉडल रेट के अंतर की राशि सीधे उनके पंजीकृत बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाएगी। योजना के सफल संचालन के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में क्रियान्वयन समितियां गठित की जाएंगी। भावांतर राशि का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी मंडी बोर्ड द्वारा किया जाएगा। जिसकी प्रतिपूर्ति सबसे पहले राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड द्वारा संचालित मूल्य स्थिरीकरण कोष से होगी। कोष में राशि अपर्याप्त होने की स्थिति में राज्य शासन द्वारा मंडी बोर्ड को 1500 करोड़ रुपये की साख सीमा (क्रेडिट लिमिट) एक वर्ष के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

94 सांदीपनि वि‌द्यालयों के वि‌द्यार्थियों के परिवहन पर फोकस
मंत्रि-परिषद ने जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि वि‌द्यालयों के वि‌द्यार्थियों के परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार वि‌द्यार्थियों के परिवहन की दर 10 हजार रुपये प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 21 हजार रुपये प्रतिवर्ष करने के साथ प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत मूल्य वृद्धि भी की जाएगी। विद्यार्थियों की परिवहन व्यवस्था, आउटसोर्स के माध्यम से आईटी- आधारित प्लेटफार्म एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था उपयोग किये जाने की शर्त अनुसार संचालित की जाएगी।

24 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने नवगठित 4 जिलों निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के लिए 24 नवीन पदों के सृजन व प्रतिस्थापन से 12 पदों की स्वीकृति दी है। साथ ही भारत सरकार की योजनाएं समेकित बाल संरक्षण योजना और सक्षम आंगनवाडी व पोषण 2.0 अंतर्गत भारत सरकार की स्वीकृति अनुसार आउटसोर्स के आधार पर मानव संसाधन की भी स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3076.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार बुरहानपुर जिले की झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 922 करोड़ 91 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। परियोजना अन्तर्गत बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के 42 गांवों की लगभग 17,700 हैक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी।

योजनाओं के निरंतर संचालन को स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने रायसेन जिले की बारना वृहद सिंचाई परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 82 करोड़ 49 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इसका मुख्य उद्देश्य पूर्व निर्मित बारना परियोजना की नहरों का विस्तारीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण किया जाना है। वर्तमान में बारना परियोजना से कुल 91,000 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है। मंत्रि-परिषद ने मंदसौर जिले की कयामपुर-सीतामऊ दाबयुक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 750 करोड़ 83 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। योजना से मंदसौर के 1,12,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मंत्रि-परिषद ने सिंगरौली जिले की चितरंगी दाबयुक्त सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरन्तर संचालन के लिए 1,320.14 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। चितरंगी दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना अन्तर्गत दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से 32,125 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।

विधि एवं विधायी कार्य विभाग के लिए राशि स्वीकृत
मंत्रि-परिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रेल 2026 से 31 मार्च 2031 के लिये निरंतरता के लिए 15,557.35 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार पंजीयक, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अंतर्गत प्रशासनिक अधिकरण, न्यायालय में कम्प्यूटराइजेशन, विशेष न्यायालय से संबंधित योजनाओं सहित कुल 11 योजनाओं की निरंतरता के लिए 1,624.69 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई हैं। विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है। राज्य के समस्त अधीनस्थ न्यायालयों यथा जिला एवं सत्र न्यायालय, सिविल न्यायालयों आदि में पदस्थ न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के वेतन, भत्तों एवं कार्यालय व्ययों के देयकों के भुगतान आदि संबंधी योजनाओं के लिए 12,252.66 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। न्यायालय भवनों के निर्माण से संबंधित योजनाओं के लिए 1,530 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है।

राज्य सूचना आयोग की स्थापना आदि के लिए 71 करोड़ 81 लाख रुपये की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने सामान्य प्रशासन विभाग अन्तर्गत राज्य सूचना आयोग की स्थापना और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण संबंधी योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि वित्तीय वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतर जारी रखने के लिए 71 करोड़ 81 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार राज्य सूचना आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन भत्ते आदि व्यय संबंधी योजना के लिए 69 करोड़ 61 लाख रुपये और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 2 करोड़ 20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय आयुष मिशन को 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 1,697 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। राष्ट्रीय आयुष मिशन, भारत सरकार, आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष पद्धति को मुख्य धारा में लाने के लिए प्रारंभ की गई है। प्रदेश में इस योजना से आयुष, चिकित्सालय एवं औषधालय, महावि‌द्यालय के विकास एवं नवीन स्थापना के लिए आवश्यक निधि प्राप्त होती है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत स्वीकृत 7 आयुर्वेद महाविद्यालय एवं जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि से 1 आयुर्वेद महाविद्यालय का निर्माण कार्य जिला डिण्डोरी में किया जा रहा है।

आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय से संबंधित अम्ब्रेला योजना पर ध्यान
मंत्रि-परिषद ने आयुष विभाग की आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय से संबंधित अम्ब्रेला योजना की 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल , 2026 से 31 मार्च, 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 3,535 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार आयुष महाविद्यालय से संबंधित योजना के लिए 3072.54 करोड़ रूपये, शासकीय होम्योपैथी महाविद्यालय के लिए 280 करोड़ 5 लाख रुपये, यूनानी महाविद्यालय के लिए 182 करोड़ 20 लाख रुपये और स्व. पं. उद्धवदास मेहता वैद्य शास्त्री आयुर्वेद सम्मान पुरस्कार के लिए 31 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस अम्ब्रेला योजना के अंतर्गत 7 आयुर्वेद महाविद्यालय, 1 होम्योपैथी महाविद्यालय एवं 1 यूनानी महावि‌द्यालय का स्थापना व्ययतथा भवनों का निर्माण कार्य किया जाता है।

शासकीय स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय, आवासीय खेलकूद भवनों का निर्माण
मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के शासकीय स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय, आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण और विस्तार से संबंधित योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन कुल 7122 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित है। योजना के क्रियान्वयन से शासकीय हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में शिक्षण कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय एवं कम्प्यूटर कक्ष, प्राचार्य, स्टाफ रूम और कैंपस निर्माण के साथ-साथ शिक्षण कक्षों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर, ग्रीन बोर्ड, इंटरेक्टिव पैनल, एवं सुरक्षा के लिए कैमरे आदि की व्यवस्था होने से विद्यार्थियों को सुविधाएं प्राप्त होगी।

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मध्यप्रदेश का चारों ओर होगा विकास, सीएम डॉ. मोहन ने डेवलमेंट के लिए मंजूर किए 13 हजार 790 करोड़ रुपये

कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में अहम फैसले
140 विधानसभा क्षेत्रों में होगा खेल परिसरों का निर्माण
इंदौर के शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 13 पदों का सृजन

22 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को कैबिनेट की बैठक में कई अहम निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में कैबिनेट में प्रदेश में बुनियादी ढांचे, कृषि विस्तार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को नई गति देने के उद्देश्य से लगभग 13 हजार 790 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में खिलाड़ियों और खेलों के विकास, किसानों, युवाओं, न्यायिक व्यवस्था और आम नागरिकों से जुड़े कई दूरगामी व जनहितैषी निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने राजगढ़ जिले की सुठालिया सिंचाई परियोजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उ‌द्देश्य राजगढ़ जिले के 40,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति द्वारा सिंचाई क्षमता विकसित करना है।

कैबिनेट ने नीमच जिले की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की आगामी 5 वर्षों 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरन्तरता के लिए 4 हजार 197 करोड़ 58 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। जावद नीमच परियोजना एक दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई योजना है, जिससे सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत सिंचाई तकनीक (दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई) के माध्यम से पानी की बचत और सिंचाई क्षमता में वृद्धि करते हुये क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाना है।

राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना पर ध्यान
मंत्रि-परिषद ने राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना की आगामी 05 वर्षों यानि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध निर्माण कर राजगढ़ जिले की 48,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है। दूसरी ओर, मंत्रि-परिषद् ने ऊर्जा विभाग की एम.पी. पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी डीबीएफओओ मॉडल बिडिंग दस्तावेजों के आधार पर कुल 2800 मेगावाट ताप विद्युत जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेश में मौजूदा निर्माणाधीन एवं राज्य में ही प्रस्तावित नवीन (ग्रीन फील्ड/ब्राउन फील्ड) ताप विद्युत परियोजनाओं से प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विद्युत क्रय के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। उल्लेखनीय है कि मंत्रि-परिषद् द्वारा 24 जनवरी 2025 को लिए निर्णय के अंतर्गत 900 मेगावाट ताप विद्युत क्रय से संबंधित अनुमोदन उक्त निविदा के निरस्त हो जाने के फलस्वरूप वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार 2800 मेगावाट ताप विद्युत क्रय में समाहित माना जाएगा। एमपी. पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी डीबीएफओओ मॉडल बिडिंग दस्तावेजों के आधार पर कुल 2800 मेगावाट ताप विद्युत जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेश में मौजूदा/निर्माणाधीन एवं राज्य में ही प्रस्तावित नवीन (ग्रीन फील्ड/ब्राउन फील्ड) ताप विद्युत परियोजनाओं से प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विद्युत क्रय के लिए आवश्यक कार्यवाही किए जाने की स्वीकृति दी है। प्रकरण में नियामक आयोग के अनुमोदन एवं आदेश के अनुसार समस्त आगामी कार्यवाही के लिए प्रबंध संचालक एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी को अधिकृत किया गया है।

140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसर निर्माण और संचालन के लिए राशि
मंत्रि-परिषद ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के तहत प्रदेश के 140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसर निर्माण व संचालन के लिए के लिए 962 करोड़ 50 लाख रुपये की सैध्दांतिक सहमति प्रदान की है। इन खेल परिसरों का नामकरण मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स काम्पलेक्स किए जाने के साथ ही मुख्य मैदान के बीच में स्थायी हैलीपैड बनाने का भी निर्णय लिया गया। हैलीपैड बनने से पीएमश्री योजना के हैलीकाप्टर्स का आवागमन सुगम और सुचारू हो सकेगा। वहीं, मंत्रि-परिषद ने ग्राम न्यायालय योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रेल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 554 करोड़ 61 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इस योजना में राज्य के समस्त ग्राम न्यायालयों में पदस्थ समस्त न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के वेतन, भत्ते एवं कार्यालयीन व्ययों का भुगतान किया जाता है। ग्राम न्यायालयों में विधि अनुसार प्रस्तुत प्रकरणों का निराकरण भी किया जाता है

मप्र विधिक सहायता तथा विधिक सलाह बोर्ड के लिए राशि
मंत्रि-परिषद ने विधि विभाग के अंतर्गत मप्र विधिक सहायता तथा विधिक सलाह बोर्ड की स्थापना योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रेल 2026 से 31 मार्च 2031 के लिये निरंतरता के लिए 524 करोड़ रुपये की अनुमति प्रदान की है। मंत्रि-परिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के पंजीयक, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अंतर्गत संचालित योजना “परिवार न्यायालयों की स्थापना” को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रेल 2026 से 31 मार्च 2031 के लिए निरंतरता के लिए 1 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है।

उच्च न्यायालय (भारित) की निरंतरता के लिए 2,015.60 करोड़ रुपए की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के पंजीयक, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अंतर्गत संचालित योजना “उच्च न्यायालय (भारित)” को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रेल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 2,015 करोड़ 60 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। मंत्रि-परिषद ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वाणिज्यिक कर विभाग के अंतर्गत संचालित 6 योजनाओं को आगामी पांच वर्षों वित्तीय वर्ष 2026-2027 से वर्ष 2030- 2031 तक की अवधि के लिए निरंतर रखने के लिए कुल 969 करोड़ 87 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इसमें संपदा ई-रजिस्ट्री योजना के लिए 62 करोड़ रुपये, स्टाम्पों की बिक्री पर व्यय योजना के लिए 664 करोड़ रुपये, स्टाम्पों की लागत योजना के लिए 175 करोड़ रुपये, विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण योजना के लिए 12 करोड़ 50 लाख रुपये, डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम योजना के लिए 46 करोड़ 37 लाख रुपये और जिला/उप पंजीयक कार्यालय भवन निर्माण/विस्तार योजना के लिए 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर के लिए पदों के सृजन को स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने दंत चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में प्राध्यापक के 1, सह- प्राध्यापक के 10 तथा सहायक प्राध्यापक के 2 पद इस प्रकार कुल 13 नवीन चिकित्सा शिक्षकों के पदों के सृजन की स्वीकृति प्रदान की है। अब बीडीएस पाठ्यक्रम की सीटें 63 से बढ़ाकर 100 एवं एमडीएस पाठ्यक्रम की सीटे 35 से बढ़ाकर 44 करने का लक्ष्य है। इस दृष्टि से 13 नवीन शिक्षकीय पदों के सृजन एवं इस पर प्रतिवर्ष लगभग 3 करोड़ 78 लाख का व्यय आना संभावित है। मंत्रि-परिषद की बैठक में नवगठित जिले मैहर व पांढुर्णा में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का जिला कार्यालय एवं सिंगरौली जिले के चितरंगी ब्लाक में विभाग का अनुविभागीय कार्यालय स्थापित करने तथा उक्त कार्यालयों में पद स्वीकृत करने एवं कार्यालय संचालन के लिए व्यय भार के लिए वित्तीय प्रावधान किए जाने के प्रस्ताव पर मंत्रि-परिषद् ने नवगठित मैहर जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का जिला कार्यालय स्थापित कर उचेहरा विकासखंड को नवगठित जिला मैहर में शामिल नहीं किया गया है अतः विकासखण्ड उचेहरा को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी अनुविभाग सतना में शामिल करते हुए जिला कार्यालय मैहर के लिए 5 नवीन स्थायी पद स्वीकृत किये जाने तथा कार्यालय सहायक के लिए 2 व्यक्ति आउटसोर्स के माध्यम से नियोजित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। नवगठित पांढुर्णा जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का जिला कार्यालय स्थापित किए जाने के लिए 5 नवीन स्थायी पद स्वीकृत किए जाने तथा कार्यालय सहायक के लिए 2 व्यक्ति आउटसोर्स के माध्यम से नियोजित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। इसी तरह सिंगरौली जिले के चितरंगी ब्लाक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का अनुविभागीय कार्यालय स्थापित किए जाने के लिए 3 नवीन स्थायी पद स्वीकृत करने तथा कार्यालय सहायक के लिए 01 व्यक्ति आउटसोर्स के माध्यम से नियोजित करने की स्वीकृति प्रदान की गई।